शिकन चेहरे पर है मगर खौफ दिल में नहीं
कैसी बेबसी है,जिने के सिवा और कुछ नहीं।
हालात ने सिखाया है हमें यूं घुंट घुंट कर जिना
शौक से अमिर,जेब फटेहाली के सिवा कुछ नहीं।
सामने पैसों के वर्षो की तजुर्बात की क्या अहमियत
कांटे की तरह चुभती गरिबी,चिराग की निशां कुछ नहीं।
न बुलाया करो अकेले में अब हमें मजलिस से बाहर
बहलता है दिल फकत साथ रहिशों के वगरना कुछ नहीं।
मेरे बदन पे लगी कालिख किसी लिबास से कम नहीं
रंगिन चादर है बद्दुआओं की सिवा इसके कुछ नहीं।
सलामती की दुआ न कर अनुराग किसी मंदिर मस्जिद में
खुश हूं ताबूत पाकर सोने की और चाहिए कुछ नहीं।
©anuragrahi
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