क्यों निराशा है आज हार का, कल तो जीत कर आओगें, बनाये रहो उम्मीदे जीत की कल परचम लहराओगें, रात ढलेगी दिन आयेगा , विजय की उम्मीदे बनाये रखना होगा, अगली बार रण कुछ और होगा , तीव्र गति से आगे बढ़ना होगा, अब तो पांच साल सूर्य की तरह तपना ही होगा, वक्त अपना भी आयेगा, बस उम्मीद बनाये रखना होगा, अगली बार सब-कुछ अपना होगा, तीव्र गति से आगे बढ़ना होगा,
©shivam pal
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