शिवरात्रि एक स्त्राव है
तरंगीय उद्भाव है ..
इसमें अंतः बाह्य ब्रह्मांडीय,
मिलन का प्रभाव है..
शाब्दिक कम्पन्नों से इसमें समभाव है
हृदय की निर्मलता से ही ,
कम्पन्नों का बहाव है..
सद्भाव धारण करने से ही,
तरंगीय प्रवाह है..
जो ब्रह्मांड से मिला दे आपको, इतने गहरे प्रभाव है
इस रात्रि मे भी प्रकाश है , आपने जब प्राप्ति का भाव है
आप निर्मलता को साध लो,
सृष्टि की भी चाह है
शब्दसंग्रह को समझना
प्रारंभिक ढाल है
और जप ही आज के लिए
क्षणिक अहसास है।।
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