हमें तूफाँ बुलाने की क्या ज़रूरत
वो खुद ही हमसे मिलता शोंक से है
बिखेरना चाहते है हमें, मगर नाकाम सा
होकर रोज़ वो,गुज़रता मौत से है...
कफ़स में कैद वो पक्षी, हर रोज़
मिलना चाहता खौफ से है,
चलो, आज़ाद भी करदें उसे कैद से
मगर फिर हमें भी घिरना शोक से है....
©deeprichu
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