बांधकर खुद के पैरों में क्रोध की जंजीर
मार रहे हैं हम खुद के ही शरीर पर बैरो के तीर
ओढ़ कर अपने शरीर पर लालच का चादर
हम खुद ही कर रहे हैं अपने सुंदर शरीर का निरादर
पहनकर अपने शरीर पर स्वार्थ के नकली गहने
लोग हमारी भावनाओं को बदसूरत लगे हैं कहने
इस पहनावे को पहनकर करते हैं हम खुद पर अभिमान
पर हकीकत तो यह है कि ऐसे लोगों पर कोई नहीं देता है ध्यान
प्रेम,संतुष्टि और निस्वार्थ भाव को जो धारण करता है
भगवान उनकी मुसीबत को बिन बोले ही हरता है
विनिता
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