खेत खलिहान में
पेड़ की छांव में
पंछियों के गान में
पत्तों की ताल में
खुले आसमान में
मिट्टी के जुड़ाव में
पानी के बहाव में
फूलों के पराग में
प्रकृति के कृतांत में
शब्दों के विराम में
विचारों के विश्राम में
मन के एकांत में
भीतर में शांति के वाद्य यंत्र बज उठते हैं
और ईश्वर रूपी कण चमक उठते हैं
जिससे हम शुद्धता से महक उठते हैं
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