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शून्यता

शून्यता
ना कोई गांव
ना कोई भा
व हृदय में रहती है खालीपन की छांव
ना जगत के दाव
ना जगत के घाव
धुंधली चादर से परे है वो,
अथाहता में बहती नाव
जिसके ना होते हैं पाव
ना दिशा का दरमियां
जहां घटित होता है निरलिप्तता का ध्यान !!