कामयाबी की पतंग
कैसे उड़े आकाश में
हाथ में कुछ हौसलों की
डोर होनी चाहिये
हौसला हाथों पे रखकर
यूं उड़ा जाता नहीं
शिद्दतों अौर मेहनतों के
पंख उगने चाहिये
कैद करले चाहे मुट्ठी में
ज़माने को मगर
हस्ती तेरी मांबाप के
कदमों में होनी चाहिये
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