सीख रही हूँ....
सीख रही हूँ तेरे बिना भी जीना,
सीख रही हूँ तेरे बिना धूप में चलना,
तेरे बिना कांटों वाले फूल चुनना…
जानता है ना तू,
कितना मुश्किल है ये मेरे लिए,
क्योंकि मुझे आता ही नहीं था
कुछ करना, कुछ सोचना… तेरे बिना।
मैंने कभी सोचा ही नहीं,
कि एक दिन ऐसा भी आएगा,
जब मुझे खुद के लिए जीना होगा,
खुद के लिए कुछ करना होगा।
पर अब करना है… तो करना होगा,
सब कुछ नया सीखना होगा।
छोड़ गया तू मुझे मंझधार में अकेला,
अब मुझे खुद ही तैरना सीखना होगा।
पर बस एक वादा कर…
जब मैं सीख जाऊँ तेरे बिना जीना,
तो कभी शिकायत मत करना
कि कैसे सीख लिया मैंने तेरे बिना चलना।.
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