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सीखा है मैंने

गर सीखा है मैंने कुछ तो
निःस्वार्थ प्रेम करना
पढ़ना सीखा है कुछ तो
उन आंखों में छुपे दर्द को
लिखना सीखा है कुछ तो
उन दबी हुई आवाज़ों को
जो आज भी क़ैद है
कहीं ना कहीं किसी कैदखाने में!
©anusingh