तेरी आंखों में तेरी कुछ ऐसी बात है
जैसे छुपे इस मे जैसे कोई गहरे राज है
लवों को बोलने की आजादी दे दो
बोलना तो बहुत कुछ चाहते पर
हुक़ूमत तुम्हारी है इन लवों पर
इसीलिये ये भी तुम्हारी तरह जज़्बात छुपाते है
बोलना तो ये भी बहुत कुछ चाहते है पर तुम्हारे आगे कहा बोल पाते है
बाते तेरी मेरी जैसी
मेरी बाते तेरी जैसी
चलने दे रब की मर्जी
उसके आगे कहा चलेगी तेरी मेरी
मत छुपा जज़्बात कभी तो इनको बाहर आने दो
बोलने है जो कुछ भी सब बोल जाने दो
बात सिर्फ लफ्जो की नही है
लफ्जो की बात होती तो इन्हें दब जाने दो
बात तेरे लफज़ो की नही बल्कि तेरे ज्जबतो की है
तु ही बाता में कैसे इन को दब जाने दु
में तेरा हर ख्बाब मुकम्बल करू
मेरा हर ख्बाब है तु
©deepakshar
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