मेरी सिफारिश नहीं है यह तुम्हारे लिए कमजोरी है ,
मैं हक और अधिकार की बात करूंगा तुम गुलामी i
मैं अपने साथी कर्मचारियों के संवेदना को समझूंगा, और तुम दलाल और ठेकेदार,चापलूस उनकी गुलामीi
मैं तो वक्त के साथ नहीं बदलूंगा मैं हक-अधिकार हूं,
सोच को बदल मगर आने वाली पीढ़ी को गुलाम करi
बुद्ध के अष्टांगिक मार्ग को अपनाना सत्य का मार्ग,
मैं तुमसे जीत गया तो मैं अंबेडकरवादी विचारक हैi
तुमने सोचना बदली क्योंकि तुमने सौदा जिंदगी का
मैं पद में छोटा जरूर था मगर हक अधिकार के लिए
मेरे लफ्ज़ सिले नहीं है खामोशी तोड़कर बोले हैं बोल
बस यही एक बात है मेरे मैं खामोश नहीं हूं शब्दों से
सिलसिला जिंदगी का यूं ही बदल जाएगा तेरे मेरे
मगर तुम मुझसे जीत नहीं पाएगा हक - अधिकार
™ Law Nishtha :) :) ©®
©lawnishtha
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