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सिया, तुमसे एक प्रश्न है मेरा... तुम तो भाग्यशाली थीं न, जिसे प्रेम में फूल…

सिया, तुमसे एक प्रश्न है मेरा...

तुम तो भाग्यशाली थीं न,
जिसे प्रेम में फूल मिले, ख़्वाब मिले,
लॉन्ग ड्राइव्स, सरप्राइज़ और
चाहत के अनगिनत जवाब मिले।

कुछ लड़कियाँ ऐसी भी होती हैं सिया,
जो बस एक संदेश पर मुस्कुरा देती हैं,
जो स्क्रीन पर दिखते एक चेहरे में ही
अपनी पूरी दुनिया बसा लेती हैं।

उन्हें मालूम होता है कि
शायद मुलाक़ात कभी मुकद्दर में नहीं,
फिर भी वे प्रेम करती हैं—
बिना शर्त, बिना शिकायत, बिना गिनती।

मगर सिया,
तुम्हारे एक फैसले ने न जाने कितने सवाल खड़े कर दिए।

अब लोग प्रेम करने से पहले
प्रेम की सज़ा के बारे में सोचेंगे,
दिल सौंपने से पहले
उसके टूटने का हिसाब लगाएंगे।

हर वफ़ादार लड़की की नीयत तौली जाएगी,
हर प्रेम पर शक की परछाई होगी,
और हर भरोसे के पीछे
एक अनकहा डर खड़ा होगा।

सोचती हूँ...

क्या एक "ना" कहना इतना कठिन था,
कि प्रेम ही कठघरे में खड़ा हो गया?

और विडंबना तो देखो सिया,
तुमने अपने नाम की सार्थकता भी निरर्थक कर दी।
एक सिया थी जो प्रेम में वनवास चली गई,
और एक सिया ने प्रेम में किसी का जीवन ही छीन लिया।

यह कैसा दौर है सिया,
जहाँ गलती एक की होती है,
और सज़ा पूरे प्रेम को मिल जाती है...! 🥀