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सजाए उलफत

उलफत की अंधेरी दुनिया मे!
दिल दीप जलाए जाते हैं!
यादों की कवर मे बिला नागा!
दिल शामो-सहर दफनाए जाते हैं!
उलफत की---------
खुद दे कर जख़म उमीदों को!
खुद जख़म सहलाए जाते हैं!
सागर दर सागर पी जाऐं!
दिल इतने!सागर पाए जाते हैं!
उलफत की---------
रह-रह कर ज़ालिम तड़पाऐं!
फिर सीने से लगाए जाते हैं!
दूरी प्रसपर धर्ती-अम्बर सी!
प्रिय-प्रियवर कहलाए जाते हैं!
उलफत की-----------
इप्तदा भी यही!इन्तहा भी यही!
उलफत मे राज छुपाए जाते हैं!
साजे-गम या खुशी की बीणा हो!
कुल,बे आबाज बजाए जाते हैं!
उलफत की----------
©ramvir