बचपने कि नदी पर समझदारी का पुल तो बना रहे हो इस समझौते से तसल्ली खूब रखना अपने दिलों मे
नहीं पता तुम्हें कि इन आँखों से कितनी चमके उतार रहे हो!!
अपलक सी निहारू तुम्हें तो वही अंदाज समझना तुम
जिस रास्ते की कालीन की तरह मुझे सजा रहे हो!!
खामोशी ही पसंद है ना तुम्हें,
तभी मेरी इस खिलखिलाहट को दबा रहे हो!!
मोम सी गुडिया नहीं बनाकर रखना चाहते ना तुम
है ना, शायद इसीलिए मुझे
कब्र का रंगीन पत्थर बना रहे हो!!
©deepika25
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