V

समय गति कभी

समय गति कभी मधुर सुबह कभी संध्या हैं
कभी कर्मों का मेला तो जीवन झमेला हैं
कभी राम’सी मूरत तो कभी कृष्ण अलबेला हैं
कभी चिंतन बहुत तो कभी बेपरवाही अपार हैं।
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©vikasgarg