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समय समय की बात..

चांद को भी ग्रहण लगता है
सूरज भी बादल में छिप जाता है
समय समय की बात है यारों
दिन कुत्ते का भी आता है
ये न समझना खास हो तुम
किसी के जीवन की आस हो तुम
तुम रहो न रहो फर्क नहीं पडता
जो साथ है उससे हीं काम चलता
मन को संतोष कहो करने
ये बेमतलब भटका हीं जाता है
राम ने चौदह साल वनवास किया
सीता ने भी तप उपवास किया
गांधी सुभाष आजाद भगत सिंह
कितनी बाधाओं को पार किया
निकलेगा कल फिर नया सूरज
दिल हर वक्त तसल्ली दे जाता है
किस चीज का मानव को अहंकार
क्यों करता जानवरों जैसा व्यवहार
जो आया है तो जाना है
क्या भूल गया विधि का आचार
तुम राम रहो या फिर रावण
सब अपनी किसमत का खाता है
देखो दुनियां है कितनी निराली
रंग विरंगी मनोहर छटा मतवाली
प्रेम भाव से भरी रहे सदा
रहे सदा होठों पे सब के लाली
पर काश! विधि का ऐसा हो विधान
यहां पल में सबकुछ लुट जाता है
समय समय की बात है यारों
दिन कुत्ते का भी आता है..
©abhidilse