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संभव

क्या संभव है प्रेम को पाना?
इस कठोर से संसार में खुद को समझ पाना।
क्या संभव है अपने दिल को बहलाना?
अपने मन से कटुता को निकाल पाना।
क्या संभव है अच्छे बुरे की समझ का होना?
सबके हृदय में अच्छाई को बीज बोना।
क्या संभव है अपने पराए के भेद का अंतर कर पाना?
अपने हृदय ग्रहित लोगों से खुद को अलग करना।
क्या संभव है अभावता में भाव का होना?
भावुकता के साथ खुद को समर्पण कर जाना।
क्या संभव है प्रेम को पाना?
©anvisha