संकेत लिखदे जमाने को,
जिस तरह कबीर कहकर गए।
रहिम, रैदास ने जो पदेँ उठाए,
तुलसी की कथा से नया जीवन पाए।
भतुँहरि की भावनाओं को समझा दे,
केशव की प्यार भरी कविता बाते।
पंत, प्रसाद, निराला की प्रकृति,
महादेवी की ददँभरी कहानी।
अज्ञेय का अनुसरण कर लेना,
मोहन राकेश के अधुरा पन पूरा कर।
हिंदी के सब साहित्य कारो कीअभिलाषा,
पूरी करने तू कलम चला, कलम चला।
डाँ. माला चुडासमा "संकेत "
©dr.mala
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