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सोच बदलने की जरुरत।

ये कैसी विडंबना है कुछ लोगों की,
बैठे बैठे तो कितनो को गुनहगार बना देते हैं,
बात पुरुष पे आई नहीं की , पूरी जाती को हैवान बता देते हैं।

©sochamit