P poojapal en July 23, 2025 सोच मेरे समाज की देकर मेरे अरमानों की बलि ...ऐ मेरे समाज के लोगों .... ये कैसी दुरगती फैलाई है इतना सबकुछ करने के बाद ये ..,कहकर निकल जाते हो की ..,,,अरे ये तो अनपढ़ ,,, .....ही आई है ...,! ©poojapal