कैद है उड़ान फ़ुरसत की गिरफ्त में गौरव
कब तक सहारा लोगे तुम उसके अस्तित्व का
अंधेरा घना है चिराग़ बनने की कोशिश करो
उसके ख़्याल में बस एक शायराना एहसास है
मन की हलचलों में कोई दिशा नहीं है
तुम्हारा ये यकीन बस एक भ्रम है , कि
रात जितनी गहरी हुई उतनी रंगीन हुई............
अब तो होश में आने की फ़िक्र करो
असली मज़ा तो अपने तूफ़ान में उसके पतंग के घूम होने का है............
©gauravrao
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