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सफर

जिंदगी की सफर में.
रुक गया हु बिच डगर में.
न कुछ पाने की चाह.
न कुछ खोने का गम.
बस जी रहा हूँ
इक इक दिन कम कर रहा हूँ.
बहुत सपने संजोये थे मैंने.
©amrendraku