खींची है ईश्वर ने डोर
शुरू हुआ सफर होते ही भोर
और चले हम पवित्र स्थलों की ओर
राहों मैं प्रकृति ने ऐसा दामन सजाया है
और स्वयं को हरित आभूषणों से सुसज्जित कराया है जहां प्रकृति के इन मनमोहन हरित आभूषणों में,
ईश्वर में बरसाती मोतियों को सजाया है
लग रहा है जैसे हर जर्रा हृदय से खिलखिलाया है
नहीं है यहां सहजता पूरित शोर
यहां तो नाच रहे हैं मग्नता से मोर
और इस सुंदर से सफर का काशी विश्वनाथ है छोर !!
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