V

सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टो

आज दिल की धड़कन फिर बोल रही थी,
छुपे हुए राज़ फिर खोल रही थी,
मैंने पूछा कौन है जो आज बोल रहा है तू,
कौन है जो मेरे दिल के राज खोल रहा है तू,
वह बोला मैं तेरा हर राज जानता हूं,
तुझको अच्छी तरह पहचानता हूं,
अब तू भी मुझको जान ले,
मुझको अच्छी तरह पहचान ले,
मैं तेरे अंदर रहता हूं,
हर दम सच मैं कहता हूं,
तू ढूंढे मुझको मंदिर में, मैं रहता तेरे अंदर में,
तू ढूंढे मुझको गुरुद्वारों में, मैं रहता तेरे दिल के तारों में,
तू ढूंढे मुझको कुरान में, मैं बस गया तेरी जान में,
तुझ ढूंढे मुझे चर्च की मोमबत्ती में,
मैं बस गया तेरे दिल की गति में,
मैं बोला तू मेरे अंदर ही रहना,
मेरा दर्द किसी से ना कहना,
तुम मेरा ध्यान रखना, मैं तेरी शान रखूंगा,
तुम मेरा ख्याल रखना, मैं तेरा मान रखूंगा
🌹विकास गर्ग🌹
©vicky