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स्त्री अवतार

एक लड़की ने इस भूमि में अपने पैर आगे रख दिए 
जन्म हुआ एक मासूमियत का 
भोलापन नज़र आती है 
चेहरे देखने पर उसकी 
जो ली  एक स्त्री अवतार 
अकेली नहीं थी जन्म उसकी द्यरति में 
साथ  पैदा हुआ सौ सपने 
सहन शक्ति नामक तलवार सौंप दिया रब ने 
कुरबान का राज़ बता दिया खुदा ने उसे 
जो कदम रखी एक स्त्री अवतार में
           
जो गुड़िया जैसी प्यारी, 
सुन्दर ऐसी,  सूरज की सुनेहराई  जैसी 
खेलते-मचलते ,  चलते -बढ़ते 
सेहरे में बँधी, औरत बनी आखिर !
आंसू की सागर बहाते भी टूटती  नहीं 
थके हुए पर भी रुकति  नहीं 
सबकी हँसी  खिलानेवाली 
कैसे हो सकती, बिन हँसी?
जो ली है स्त्री अवतार !
प्यास है उसे जीने की 
अपनी आँगन को खुशियों से भरने की 
स्त्री अवतार मै रहे ही हर स्थिति में  वीरांगनी बनने की!
मरती है लोगों के जान में बसते ही , 
जो मिटाई हर मुश्किल 
पायी वह  जो हर मंज़िल 
बन जाती है 
ईस्वर की प्यारी 
सपनों भरे जन्नत में
- संजना कृष्णन वी के 
©sanjana11