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" सुधार "

सरलता को साधकर
हृदय को सुधारकर
शुद्धता के अहाते में,
तू खुद से बातकर
भीतर के दरमियाँ में
दिन-रात गुजारकर
तू खुद की तलाश कर
तू खुद की तलाश कर
बुरे भाव के समंदर में
ना किसी का गुमान कर
कटुता से ना भीतर में गहरा वार कर
मधुरता से अपने हृदय में तू प्राण भर
सांसारिक क्षणभंगुरता पहचान कर
तू मासूमियत तराश कर
ईश्वर का आभास कर
बस ईश्वर का आभास कर!!
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