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...सुकुन...

इंतज़ार-ए-मोहब्बत तेरा बरसों से कर रहे हैं,
जान-ए-ज़िन्दगी से अलग कर रहे हैं,
बीत गए हो लम्हें जुदाई-ए-तसव्वुर में तेरे,
शायद ही कभी मिला हो सुकुन-ए-इश्क़ यादों से तेरे।।
- Nilesh Ingole
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