वक्त की इन गर्दिशों में ,
सुकून की तू आह भर
कमियों को सुधार कर,
हृदय से मुलाकात कर
निर्मलता के इन प्राणों में ,
तू सरलता भर मारकर
प्रपंच की कुटिलता में ,
तू मधुर शंखनाद बन
श्वास के हर कण में,
सुंदर विचारों का संचार कर
वाणी के हर वर्ण में ,
नम्रता प्रवाह कर
हर कण-कण को निहार कर,
तू ईश्वर का एहसास कर...
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