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सुनापन

आज कुछ ज्यादा ही खलिश सी है जिंदगी में,
कि तुझ बिन सुनापन भी बहुत है,
ये उदासियां,
ये तनहाइयां,
ये रुसवाईयां,
ये पागलपन,
सब जैसे एक साथ ही आ गए हो,
मुझे तबाह करने,
ये बोझिल सी सांसे,
ये बेमन सा मन,
ये रूठा सा दिल,
ये तड़पती निगाहें,
सब जैसे छोड़ना चाहती हो मेरा साथ,
हर्फों का भी अपना एक अलग उसूल रहा,
जितना दिल खुश रहा,
उतना इन्हें सजोने का मौका मिला,
आज उदासीन से सब है,
हर्फ हो,
या अक्स हो,
या अनचाहे से पल हो,
सब के सब बेमतलब, बेजान, बेरस हो गए,
सब के सब कहीं तो खो गए,
सब के सब कहीं तो खो गए।।
©anvisha