यह सुन्दरता की रानी क्या क्या नहीं करती।
सुबह उठते ही भले नहाये ना।
पर सबसे पहले देखे आईना।।
चेहरे का पूरा करती है निरक्षण।
पिम्पल्स या जुर्री ने तो ना ले लिया आरक्षण।।
नहाने का अंदाज़ तो सभी प्राणियों से निराला।
चाहे वो बुढ़िया हो या छोटी सी बाला।।
हर साबुन शेम्पू अपने बाथरूम में पाला।
सच यही है सुन्दरता की प्राइमरी पाठशाला।।
खाने के समय कभी अपनी उंगलिया सब्जी में ना डुबाती।
क्यों कि सामने वाले की निगाह तो उंगलियों पर ही जाती।।
तो फिर खाना कैसे खाती
अब आती है अपने मुख्य काम पर …
ढेरों लिपस्टिक पावडर पिन क्रीम इत्र।
खुद भगवान् भी ना कर सके जिनका जिक्र।
फिर भी पति या प्रेमी को करनी पड़े फिक्र।
ना जाने किस-किस से करती है चहरे की लीपापोती।
पानी से तो यह देवी शायद ही चेहरे को धोती।।
क्या सजाती है नाख़ून इतने लम्बे और नुकीले
हाय राम नाख़ून है या कीलें।
प्यारे भालू तो देखे के ही डर जायें
और कुंवारे हो तो देख के ही मर जायें।।
इनके होठों की होती है जो लालिमा।
दरअसल यहीं होता सुन्दरता की बीमा।।
थोड़ी सी होठों से लालिमा हटी।
समझों उस सुंदरी के साथ दुर्घटना है घटी।।
तो इस तरह मेकअप को बनाके अपना हथियार।
सज धज के झाँसी की रानी दिल चीरने को तैयार।।
अब निकल के आ बैठती है कार में।
और निकल पड़ती ही शिकार में।।
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©vikasgarg
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