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सुनो…

सुनो…
यूँ “चुप” सी न रहा करो,
यूँ “खामोश” सी जो हो जाती हो,
तो दिल को “वहम” सा हो जाता है,
कहीं “खफा” तो नही हो..??
कहीं “उदास” तो नही हो…??
तुम “बोलती” अच्छी लगती हो,
तुम “लड़ती” अच्छी लगती हो,
कभी “शरारत” से, कभी “गुस्से” से,
तुम “हँसती” अच्छी लगती हो,
सुनो…
यूँ “चुप” सी ना रहा करो।
🌹🌹🌹
©vikasgarg