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सुनो रागिनी

सुनो रागिनी
वो खिड़की बरामदे वाली ज़रा खुली रखना
हवाँ आती जाती रहेगी जुल्फ़े थोड़ी ढिली रखना
चाय में चीनी कम थोड़ी इलायची ज्यादा
अदरक थोड़ी कम ज्यादा
बस चाय अधी कप रखना
सुनो
मैं लिखने में थोड़ा मसरूफ़ रहूंगा
दो- चार बार आकर गीले बालों की कुछ छीटे छिड़क कर मेरी नज़र
तुम पर बनाए रखना
बस
आँखों में सुरमा थोड़ा कम
होंठों पर सुखी सुर्खि थोड़ी जादा रखना
वो खिड़की बरादमे वीली ज़रा खुली रखना
रेडियो पर किशोर जी के गाने बिना चलाएं रखना
अवाज़ आती जाती रहे ...
रसोई का परदा ज़रा सरकाए रखना
बस बर्तनों की खटपट थोड़ी कम रखना
वो खिड़की बरादमे वीली ज़रा खुली रखना
— अनुराग सिंह
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