सुप्रभात की मनोहर बेला,
अति सुहाना लगती है।
बागों कि कलियाँ अलबेला,
सूर्य किरण में खिलति है।
घोसले से बाहर आ परिन्दे शोर मचाते,
सुप्रभात के नव संदेशों को पहुचाते।
है सब निन्द्रा से बाहर आ जाते,
सुप्रभात का अति आनंद उठाते।
सुप्रभात के नए बेला में,
है खुशी-खुशी कार्यों में लग जाते।
सदा प्रभु प्रार्थना के विश्वास में,
सुप्रभात को नए अंदाजो में बढ़ाते।
फूलों पे नवकिरण जब पड़ते,
मनमोहक सुगंध दूर-दूर तक बिखरते।
सभी के दिल को आनंदित करता,
नव विचार व उमंगों से भरता।
आशा के नए किरण,
सुप्रभात होते ही पूर्ण हो जाते हैं
आ पड़ते पृथ्वी पर सूर्य किरण,
सारे दुनिया खिल जाते हैं।
©raushan
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