V

सुर्य अस्त

कुछ कर पाता नही
सिर्फ सोचना ही,मेरी फितरत है
तकलीफ देती जो बार-बार मुझको
ना जाने वही होती क्यूं हरकत है
आकर भगवन, तू ही संभाल, मेरे देश को
बर्बाद हो रही, मेरी सारी मेहनत है
वरना होकर रहेगा राम नाप सत्य देश का
अब मुझसे तो देखी जाती नही इसकी गत्त है
विकास के काम कम हो रहे
विनाश के सारे रास्ते प्रशस्त है
खुशहाल जिसका नागरिक नही
एक दिन जरूर होना उसका सुर्य अस्त है
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©vicky31