ताउम्र राह देखी अब कब आइएगा आप
बिगड़े नसिब को मेरे कब बनाइएगा आप।
मेरे दिल को कम से कम ऐसे न तड़पाइए
आइना देखने को तरस जाइएगा आप।
हर चीज़ मिल जाएगी है जो खोई हुई
मुझको ढुंढ के कहां से लाइएगा आप।
मेरी राय है मुझको नज़र से उतरने न दिजिए
सभी लोगों के नज़र पर चढ़ जाइएगा आप।
आगे अपने मुझे लगा रहने दिजिए पर्दे की तरह
हट गया गर तो साफ़ नज़र आइएगा आप।
अनुराग के लिए बहुत कम है जिंदगी का सफर
हम पुछते है आज नहीं तो कब आइएगा आप।
©anuragrahi
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