Y your_rohit en July 23, 2025 tere bina aesa hu mae..... "बिछड़ के तुम से ज़िंदगी सज़ा लगती है;यह साँस भी जैसे मुझ से ख़फ़ा लगती है;तड़प उठता हूँ दर्द के मारे, ज़ख्मों को जब तेरे शहर की हवा लगती है;अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किस से करूँ;मुझ को तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफ़ा लगती है..!!©rohittiwar