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तेरे चेहरे को मैं अब भुलाऊं कैसे।

मैं कहता था कि मैं ठीक हुँ तू कहती थी मैं ठीक हुँ
हमारी यही गलती ने तुम्हें मुझसे मुझे तुझ से दूर किया।
तेरे चेहरे को मैं अब भुलाऊं कैसे
अपने वादों को अब निभाऊं कैसे।
बेवक्त बेसहारा होना मेरी ये मजबूरी
मासूमों के तेरे धीरज दीलाऊं कैसे।
ये पहाड़ सा जीवन और कंटीली रास्ते
इस व्यथित मन को समझाऊँ कैसे।
लोग कहता है पागल कैसा ये जमाना
पुरा किए बिन वादे सिर मुंडवाऊं कैसे।
है जिगर से हट्ठी तेरा दिलबर तेरा अनुराग
बुलाओ न अभी मुकम्मल हुए बिन पास आऊं कैसे।
©anuragrahi