तेरे होंठो पर कांपता हुआ वो नाम किसका था
अगर मेरा नही था तो,वो जनाब किसका था।
मेरे हर खत लिखे हुए शायद तुम्हे मिले ही नही
रास्ते मे ही रह गए जाने पता किसका था।
आप गर प्यार करते तो एक फोन किया होता
इंतजार-ए-खत ही क्यों ये खता किसका था।
कहती थी वफा करेंगे और उसे निभाएंगे भी
याद आ रहा है तुझे कि वो जुबान किसका था।
रहा न दिल मे वो बेदर्द और दर्द रहा
मुकीम कौन हुआ है मुकाम किस का था।
हर एक से कह रही हो अनुराग बेवफा निकला
पुछे कोई तुमसे कि मैं गुलाम किसका था।
©anuragrahi
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