तेरे हुस्न का जब जनाजा उठेगा
मेरे जिंदगी की मैयत भी होगी।
अभी साथ साथ जिंदगी हमने जी है
जिने मरने की साथ वादें कई की है
हमारे साथ साथ इश्क का कारवां चलेगा
मगर रस्ते में कई इम्तिहां भी होगी।
तेरे हुस्न का जब जनाजा उठेगा
मेरे जिंदगी की मैयत भी होगी।
सनम रोक लेता दुर जाने से तुझे पहले
गर सवाल आते दिल-ओ-दिमाग़ पहले
जगह अब यहाँ कौन तेरा भरेगा
चार-सू मेरे आंखों के तारिक होगी।
तेरे हुस्न का जब जनाजा उठेगा
मेरे जिंदगी की मैयत भी होगी।
मुझे भुल जाने की कभी कोशिश न करना
किए हुए वादों का हक अदा भी करना
जन्नत में तेरे लिए इक मरहला सजेगा
वहीं पे दुबारा मुझसे फिर मुलाकात होगी।
तेरे हुस्न का जब जनाजा उठेगा
मेरे जिंदगी की मैयत भी होगी
मेरे जिंदगी की मैयत भी होगी
मेरे जिंदगी की मैयत भी होगी।
©anuragrahi
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