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तेरे जिस्म की वो दिल-ओ-जीगर कैसी है।

तेरे जिस्म की वो दिल-ओ-जीगर कैसी है
कुछ ब्यां नहीं करती ये मुहब्बत कैसी है।
हम तो शनास-ए-इश्क की परवाह नहीं करते
तुम्हारे पैरों में बंधी ये बेंरीयां कैसी है।
किसी से मिलना बातें करना ये गुनाह नहीं
फिर तेरे मेरे बीच लगीं पहरेदारीयां कैसी है।
मुहब्बत खुदा है मुहब्बत में ही ख़ुदा है
बेवजह लोगों में चल रही कानाफूसीयां कैसी है।
रू-ब-रू होकर जमाने से एक बार कह दो
हमारे बिच में उल्फत की कहानियां कैसी है।
तुझे मालूम नहीं किस तरह अनुराग जिंदा है
मत पूछना हमसे कि ये दुसवारीयां कैसी है।
©anuragrahi