तेरे याद आंसूओं से गर आंखों को भर नहीं जाता
कसम खुदा की तब तलक मैं घर नहीं आता।
तुम्हारी अदा ही तो मेरे नब्ज़ों को जान फुंकती हैं
ये गर नशा होता तो एक दिन उतर नहीं जाता।
ये सच है कि मुझे मुहब्बत का बहुत बड़ा है रोग
मगर ज़हर होता तो अभी तक मैं मर नहीं जाता।
शायद उनके मरहला-ए-दिल में रोशनदान नहीं
नहीं तो मेरे दर्द-ए-दिल का ख़बर नहीं जाता।
रिश्तों में दरारें हमेशा दिखती रहेंगी अनुराग
गलतफहमियों का वहम गर दिल से उतर नहीं जाता।
©anuragrahi
S