I

तेरी आदत तो लगा दी तूने मेरी जान, अब ये बता तेरे बिना जीते कैसे हैं… नाराज़…

तेरी आदत तो लगा दी तूने मेरी जान,
अब ये बता तेरे बिना जीते कैसे हैं…

नाराज़ नहीं हूँ तुझसे, ये दिल समझदार है,
जानता है तेरी ख़ामोशी के पीछे फ़र्ज़ों का भार है।
तू ग़ायब नहीं, बस ज़िम्मेदारियों में खोया है,
और मैंने तेरे इंतज़ार को ही अपना सुकून बोया है।

ना कोई शिकायत, ना तुझसे कोई गिला रखती हूँ,
बस तेरी एक झलक की उम्मीद दिल में जगा रखती हूँ।
तू ऑनलाइन नहीं आता — ये दर्द नहीं बनता,
पर तेरे बिना हर दिन थोड़ा अधूरा सा लगता हैैा।

मुझे पता है तेरी दुनिया आसान नहीं होगी,
हर मुस्कान के पीछे कोई थकान छुपी होगी।
इसलिए दुआ करती हूँ — तुझे सुकून मिले हर शाम,
चाहे उस सुकून में मेरा नाम हो या ना हो मेरा नाम।

इश्क़ शायद यही है — शोर नहीं करता,
पास होने की ज़िद नहीं, बस साथ महसूस करता।
तू अपने फ़र्ज़ निभा, मैं अपने इंतज़ार निभाऊँगी,
तू वक़्त से बंधा है… और मैं तुझसे बंध जाऊँगी।

-शिवन्या