तेरी उम्र बड़ी हो मेरा बस खुदा है।
मेरे मर्ज का अब नहीं कोई दवा है
तेरी उम्र बड़ी हो मेरा बस खुदा है
सामने ही खड़ा है दिया जिसने ज़ख़्म
उसे कैसे कहूं मैं कि तू बेवफा है
बनाएं है हमने आंसुओं का समन्दर
गर रोता है कोई तो दिल कांपता है
होंठ खुले मगर बंद कंपकंपा कर हो गए
तुम्हें कुछ कहूं अब नहीं हौसला है
सोंचता हूं,तुम्हें कि इस दिल को मनाऊं
आजकल हर कोई अनुराग हमसे रूठता है।