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तेरी वो झूठी हंसी

तेरे पल्लू की झूठी छाँव से अब ,
मेरे फटे लिबास की साख भली।
महलों की झूठी हँसी से तेरे ,
मेरी गलियों की ये ख़ाक भली।
©anusingh