थी हुई कभी दिलकशी इस दिलजलो के देश में
अफसोस अब वो नहीं रहीं उस दिलनशी का शुक्रिया।
सुखा पुराना जख्म और नए को जगह मिली
स्वागत तुम्हें ऐ नए जख्म और पुराने का शुक्रिया।
इस छोटी सी जिन्दगी ने देखें कई उतार-चढ़ाव
अब ढलान-ए-उम्र हैं गुजरी जवानी का शुक्रिया।
गम मिलते हैं तो और निखरती है यह शायरी
यह बात गर है तो सारे जमाने का शुक्रिया।
बच्चा सा माँ की गोद में आकर मैं लिपट गया
जिंदगी यादों के सहारे तेरी यादों का शुक्रिया।
जाती न गर तुम तो क्यों मैं बनाता तुमसे दुरीयां
ये खुशी, मेरे राह से तुम्हें हट जाने का शुक्रिया।
अब अनुराग को आ गए हैं मनाने के वो सब हुनर
यूं मुझसे ये खुशनशी तुम्हें रूठ जाने का शुक्रिया।
©anuragrahi
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