V

तीर्थ क्षेत्र हूँ मैं

सुने कोई जो तो मैं इक व्यथा सुनाऊँ,
तीर्थ क्षेत्र हूँ मैं, मैं अपनी कथा सुनाऊँ,
सुने कोई जो तो मैं इक व्यथा सुनाऊँ,
मानव करते पाप जीवन भर सारे,
पापों का ढेर तीर्थ में आकर डारे,
बदबू उसकी सारी अपने पेट में समाऊं,
सुने कोई जो तो मैं इक व्यथा सुनाऊँ,
बदबू के साथ अब जीना दुश्वार है,
पुण्य कम है, पाप यहाँ बेशुमार है,
गला घूंटता है अब कहाँ मैं जाऊँ?
सुने कोई जो तो मैं इक व्यथा सुनाऊँ,
🌹🌹🌹
©vikasgarg