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tilak gondavi

इन्तजार की धूप में मुलाकात की छाँव रहती है।
मुझे अच्छा लगता है,जब वो मेरे गाँव रहती है।
दिल में चिलकन होती है ,कहीं कोई कांटां न चुभ जाऐ,
आँखे बरसती है जब वो नंग्गें पाँव रहती है।
@ कवि- तिलक गोण्डवी।
©tilak