एक सपना देखा था कि मैं भी घर बनाऊंगा,
तिनका तिनका जोड़ कर घर को सजाऊंगा,
सोचा कि प्यार के तिनके की नींव बनाऊंगा,
धरती की सहनशीलता से सारा बोझ उठा लूंगा,
आशीर्वाद के तिनकों की बौछार से सीमेंट गीला किया,
श्रद्धा के तिनके लगाकर सीमेंट डाल दिया,
दीवारें खड़ी हो गई छत भी बन गई,
सादगी के प्लास्टर से दीवारें सज गई,
ना जाने कौन से तिनके का मिजाज बदल गया,
उसने घर छोड़ने का सोच लिया,
उस तिनके को देख कुछ और तिनके जाने लगे,
देखते यह मंजर छत के तिनके शोर मचाने लगे,
हवा के झोंके से हर एक तिनका उड़ने लगा,
हरेक तिनका घर छोड़कर जाने लगा,
कलयुग के झोंके से निर्जन हो गया था मेरा संसार,
पर संग खड़ा था मेरे वह प्रभु लेकर तिनको का भंडार,
उसके संग मिलकर फिर घर की नींव बनाई,
तिनका जोड़ जोड़ के घर की छत फिर से सजाई
(तिनका- इंसान, मित्र, रिश्ते)
विकास गर्ग
©vicky
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