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तलाश

तपिश उतनी ही है जितनी पहले थी,
चुभता आज भी है वही,
जिसकी चुभन की बात पर
मरहम बन वो आया था,
आज ज़खमों को फिर उसी ने कुरेद दिया,
कहा तुमसा नहीं
तुमसे बेहतर की तलाश थी,
तुम वो नहीं जिसकी मुझे आस थी।।
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